पीएम मोदी और शी जिनपिंग के संघर्ष में समानता है
पीएम मोदी और शी जिनपिंग के संघर्ष में समानता : चीन के राष्ट्रपति 11 अक्टूबर को अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको तमिलनाडु के महाबलीपुरम शोर मंदिर का दर्शन कराया। दोनों ने 6 घंटे मुलाकात की जो अनौपचारिक थी। दोनों राष्ट्र अध्यक्षों के बीच खुलकर बातचीत हुई है हालांकि दूसरे दिन अलग-अलग स्तर पर बातचीत होगी। शी जिनपिंग चीन की सत्ता पर आजीवन काबिज होने के लिए चुने जा चुके हैं और नरेंद्र मोदी फिलहाल अपना दूसरा कार्यकाल निभा रहे हैं। दोनों ही नेता अपने देश में सर्वोच्च पद पर आसीन है लेकिन दोनों की फर्श तक अर्श तक का सफर संघर्ष की समानता की बानगी देता है। नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन एक सन्यासी बालक कम राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रचारक के रूप में शुरू किया, संगठन बीजेपी में भेजे गए।
भारतीय जनता पार्टी के मंत्री रहे तो पार्टी को मजबूत किया फिर महासचिव, प्रवक्ता पदों पर होते हुए मुख्य रणनीतिकार और 2001 में गुजरात में भाजपा को सँभालने के लिए मुख्यमंत्री बनाये गए। वहां से और आगे बढ़ते हुए 2014 में पीएम पद के लिए बीजेपी में सबसे बड़े उम्मीदवार के रूप में सामने आये। पार्टी ने 2014 में मोदी को ज़िम्मेदारी सौंपी। मोदी ने भाजपा को अकेले दम पर पहली बार बहुमत दिलवाया। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल का 5 साल शानदार साबित हुआ और मोदी पुनः जीत कर वापस आये वह भी पहले से अधिक प्रचंड बहुमत के साथ।
पीएम मोदी और शी जिनपिंग के संघर्ष में समानता : सीख क्या मिलती है ?
चीन के आजीवन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कहानी भी अपने पिता शी जोनडांग की तरह ही रही। उन्होंने कम्युनिस्ट क्रांति के मशहूर नेता रहे अपने वालिद की राह पर चलते हुए पहले चीन लिबरेशन आर्मी के सैनिक के तौर पर कार्य किया। उसमें अच्छा प्रदर्शन करते हुए वह आगे बढ़े और फिर कम्युनिस्ट पार्टी में एंट्री करी। उनको कार्य करने का मौका दिया गया। हॉंकॉंग वही जगह बना जहाँ उन्होंने पार्टी का गढ़ स्थापित किया और इसे आगे तरक्की का पावर हाउस बना डाला।
इसके बाद प्रांत मंत्री होते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें चीन का सर्वोच्च नेता, पार्टी का मुखिया और फिरआखिकार उन्हें देश की कमान सौंपी गई। वह अब चीन के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में चुने गए जीवन पर्यन्त, ऐसी उपलब्धि माओ के बाद उन्हें ही प्राप्त हुई है। इसके लिए चीन देश के संविधान में बदलाव भी किया गया था।
मोदी और शी जिनपिंग की संघर्ष में समानता यही सिद्ध करती है हर दिन आपको कड़ी मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य की तरफ पहुँचने वाली हर सीढ़ी पर संघर्ष करना है। हर दिन आपको संघर्ष करना ही है सफलता को अपनी जागीर जो बनाना है। मोदी और जिनपिंग से यही सीख मिलती है।
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

